विरुद्ध आहार क्या है? उसको क्यों खाना नहीं चाहिए? उससे शरीर में क्या नुकसान होते हैं? उस पर मनन चिंतन करते हुए यह लेख तैयार हुआ है। आशा करता हूं कि आपको यह लेख पसंद आएगा। यह लेख में  विरुद्ध आहार के पीछे क्या साइंस है उसको भी कवर किया गया है।

हम सभी जानते हैं हेल्दी रहने के लिए सही पोषण की जरूरत होती है। मगर हम में से बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि, कई बार हेल्दी फूड भी आपके शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। ऐसा तब होता है, जब आप उसे किसी ऐसे आहार के साथ ले रहे होते हैं, जो उसके पोषक तत्वों को नष्ट कर देता है। इसी को आयुर्वेद में विरुद्ध आहार (Incompatible Diet) कहा जाता है। यानी एक आहार दूसरे आहार के पोषक तत्वों को नष्ट कर रहा है।

कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनकी तासीर एक-दूसरे के साथ मेल नहीं खाती, जैसे दूध और मछली। इन्हें एक साथ खाने से आपको दोनों में से एक का पोषण भी नहीं मिल पाता। ये दोनों ही एक-दूसरे के पोषक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। यही विरुद्ध आहार (viruddh aahar) हैं। जो आपके पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के नियमों और सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर रहा है। इसके अनुसार हमारा पूरा स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या खाते हैं। 

आयुर्वेद में स्वास्थ्य किसको कहते हैं?

जो खोराक खाने से शरीर की सप्त धातु संतुलन में रहती है। सात प्रकार की धातुएँ प्लाज्मा, रक्त, मांसपेशी, वसा(फेट), हड्डी, अस्थि मज्जा(bone marrow) और प्रजनन द्रव(वीर्य)हैं। तीन दोष कफ पित्त और वात  संतुलित रहता है। जठराग्नि सही रहती है जो विषैला पदार्थ को खत्म करती है और भूख को बनाए रखती है। जो खुराक खाने से मन प्रसन्न रहता है। उसको स्वास्थ्य कहते हैं।इन सभी को संतुलित रखने के लिए भोजन महत्तवपूर्ण है।

विरुद्ध आहार खाने से हमारे शरीरमें क्या होता है?

विरुद्ध आहार हमारी पाचन प्रणाली पर असर करता है। यानी कि हमारा मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है। जो विरुद्ध आहार हम ले रहे हैं उसका सही पाचन नहीं होता तो उसमें से टॉक्सिन पैदा होते हैं वह टॉक्सिन हमारे शरीर को नुकसान करते हैं। विरुद्ध आहारको लंबे समय लेने से चमड़ी के रोग होते हैं। जैसे की खुजली आना, सफेद दाग पड़ जाना, लाल कलर के चकामे बन जाना। और वह पाचन नहीं हुआ आहार हमारे शरीर में जाता है तो वह कई तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है जैसे की डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मानसिक समस्याएं, ओबेसिटी, फैटी लीवर और पाचन तंत्र की कई समस्याएं।

विरुद्ध आहार कौन-कौन से हैं?

हमारे ऋषि मुनि भागवट जी  बताते है कि

प्याज और दूध को एक साथ नहीं खाना चाहिए।

दूध और कटहल यानी कि जैकफ्रूट को एक साथ नहीं खाना चाहिए।

दूध और खट्टा फल यानी कि साइट्रिक फूड दूध के साथ नहीं खाना चाहिए। दूध के साथ आमला खा सकते हैं। दूध के साथ मीठे फल खा सकते हैं।

दूध के साथ पक्का आम खा सकते है।

शहद और घी समान मात्रा में न खाऐ और खाना है तो दोनों की मात्रा एक  नहीं होनी चाहिए।

शहद को गर्म करके मत खाए।

उड़द की दाल और दही गलती से भी साथ न खाए। हम दही वड़ा बनाकर खाते हैं वह गलत है।

उड़द की दाल खाना है तो अकेला ही खाए बहुत अच्छा है।

दही वड़ा खाना है तो मूंग की दाल और दही खा सकते हैं मगर दही को थोड़ा बघार के खाओ।

दही और भात का सेवन अच्छा नहीं है उससे ज्यादा नींद आती है।

खीर के साथ दही और मट्ठा नहीं खाना चाहिए।

दूध और दूध की बनावट 3 साल तक के बच्चे के लिए सही है क्योंकि उसको पचाने के लिए पर्याप्त मात्रमे एंजाइम मौजूद है।

जिन लोगों को दूध और दूध की बनावट से एलर्जी है वह अच्छी तरह से  पचा नहीं सकते उसको ये लेना नहीं चाहिए।

मूंगफली बादाम और अखरोट को पानी में भिगोकर खाना अच्छा है। ऐसा करने से उसका प्रोटीन सुपाच्य हो जाता है और ऊपर के छिलके निकल जाते हैं तो वह अच्छी तरह से अवशोषित होता है।

ग्रीन चाय या ब्लैकचाय के साथ  दूध मिक्स करना अच्छी बात नहीं है। ग्रीन टी या ब्लैक टी अकेले पी सकते हो। चाय में दूध से एंटीऑक्सीडेंट तत्व कम होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।

खाना खाते वक्त ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक नहीं पीना चाहिए वह जठराग्नि को मंद कर देता है।

कोई भी भोजन समय अनुसार, मात्रा अनुसार, ऋतु अनुसार, प्रकृति अनुसार, स्थान अनुसार और भूख के अनुसार लेना चाहिए।

शहद और घी को साथ में नहीं खाना चाहिए क्यो?

घी और शहद को बराबर अनुपात में मिलाने से वह एक टॉक्सिक एलिमेंट बना लेता है वह आपके स्वास्थ्य के लिए परेशानी भी खड़ी कर सकता है।  घी और शहद को मिलाने पर ‘क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम’ (Clostridium botulinum) नामक पदार्थ शरीर में तेजी से फैलता है, जिसके कारण सांस संबंधी समस्याएं, पेट दर्द और यहां तक कि कैंसर तक का कारण भी बन सकता है। दरअसल, क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम एक प्रकार का बैक्टीरिया होता है, जो कम ऑक्सीजन की स्थिति में भी खतरनाक विषाक्त पदार्थों का उत्पादन कर सकता है।

शहद यानी कि मध को गर्म क्यों करना नहीं चाहिए?

नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की एक रिपोर्ट बताती है कि, यदि शहद को 60 से 140 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाएं तो शहद में भूरापन आने लगता है और इससे हानिकारक प्रभाव पैदा होता है।

साथ ही रिपोर्ट में पाया गया कि 60º और 140°C गर्म शहद के नमूनों में  5-Hydroxymethylfurfural (HMF) नामक कंपाउंड में वृद्धि देखी गई, जो कि स्वास्थ्य के लिए एक हानिकारक तत्व होता है। यह तत्व कैंसर पैदा कर सकता है। चीजे ठंडी करके ऊपर मत डालकर खा सकते हैं।

दही रात को क्यों खाना नहीं चाहिए?

अगर आपको पाचन संबंधी कोई समस्या है तो रात में दही खाने से  परेशानी बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह वसा और प्रोटीन से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट है, जिसे रात में पचाना मुश्किल हो सकता है। इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी कम हो सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर में ज्यादा बलगम बनने लगता है। दही का तासीर ठंडा होता है, लेकिन इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है । अस्थमा, खांसी और सर्दी से ग्रस्त लोगों को  रात्रि में दही नहीं खाना चाहिए। दही खाने का सही समय सुबह या दोपहर है। जिन लोगों को डेरी प्रोडक्ट से एलर्जी है उन लोगों को दही नहीं खाना चाहिए।

 आशा करता हूं कि आपको यह लेख आपको पसंद आया होगा। पसंद आया हो तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को फॉरवर्ड करके लोक कल्याण का यही कार्य में आप भी सहभागी हो ऐसी आशा के साथ। आपका शुभ चिंतक डॉक्टर चिमन भाई पटेल। आप स्वस्थ रहें निरोगी रहे खुश रहे ऐसी प्रभु को प्रार्थना।

लेखक: डॉक्टर चिमन भाई पटेल.

Leave a comment

Trending